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हमारे ऋषियों और मुनियों द्वारा किये गये आविष्कार

हमारे ऋषियों और मुनियों द्वारा किये गये आविष्कार! 🚩🕉️🌹🍁🚩🕉️🌹🍁🌞🚩🕉️ महर्षि दधीचि : - महातपोबलि और शिव भक्त ऋषि थे। वे संसार के लिए कल्याण व त्याग की भावना रख वृत्तासुर का नाश करने के लिए अपनी अस्थियों का दान करने की वजह से महर्षि दधीचि बड़े पूजनीय हुए। इस संबंध में पौराणिक कथा है कि एक बार देवराज इंद्र की सभा में देवगुरु बृहस्पति आए। अहंकार से चूर इंद्र गुरु बृहस्पति के सम्मान में उठकर खड़े नहीं हुए। बृहस्पति ने इसे अपना अपमान समझा और देवताओं को छोड़कर चले गए। देवताओं ने विश्वरूप को अपना गुरु बनाकर काम चलाना पड़ा, किंतु विश्वरूप देवताओं से छिपाकर असुरों को भी यज्ञ-भाग दे देता था। इंद्र ने उस पर आवेशित होकर उसका सिर काट दिया। विश्वरूप त्वष्टा ऋषि का पुत्र था। उन्होंने क्रोधित होकर इंद्र को मारने के लिए महाबली वृत्रासुर को पैदा किया। वृत्रासुर के भय से इंद्र अपना सिंहासन छोड़कर देवताओं के साथ इधर-उधर भटकने लगे। ब्रह्मादेव ने वृत्तासुर को मारने के लिए वज्र बनाने के लिए देवराज इंद्र को तपोबली महर्षि दधीचि के पास उनकी हड्डियां मांगने के लिये भेजा। उन्होंने महर्षि से प्रार्थना करते ह...

हमारे ऋषियों ने वेदों को कैसे सुरक्षित रखा ?

हमारे ऋषियों ने वेदों को कैसे सुरक्षित रखा ?  🕉️🍁🚩🌞🌹🕉️🍁🚩🌞🌹🕉️ जाने वेदों में रत्ती भर भी मिलावट क्यों नही हो सकी ? जब कोई सनातनी ये बताने की कोशिश करता हैं की हमारे ज्यादातर ग्रंथों में मिलावट की गई है तो वो वेदों पर भी ऊँगली उठाते हैं की अगर सभी में मिलावट की गई है तो वेदों में भी किसी ने मिलावट की होगी....परन्तु ऐसा नही हैं क्यों नही हैं जानते हैं..वेदों को सुरक्षित रखने के लिए उनकी अनुपुर्वी, एक-एक शब्द और एक एक अक्षर को अपने मूल रूप में बनाये रखने के लिए जो उपाय किये गए उन्हें आज कल की गणित की भाषा में 'Permutation and combination' (क्रमपरिवर्तन और संयोजन) कहा जा सकता हैं.. वेद मन्त्र को स्मरण रखने और उनमे एक मात्रा का भी लोप या विपर्यास ना होने पाए इसके लिए उसे 13 प्रकार से याद किया जाता था.... याद करने के इस उपाय को दो भागों में बांटा जा सकता हैं.... प्रकृति-पाठ और विकृति-पाठ.... प्रकृति पाठ का अर्थ हैं मन्त्र को जैसा वह है वैसा ही याद करना.... विकृति- पाठ का अर्थ हैं उसे तोड़ तोड़ कर पदों को आगे पीछे दोहरा-दोहरा कर भिन्न-भिन्न प्रकार से याद करना.... याद करने के इ...

संस्कृत भाषा का कोई विकल्प नहीं

संस्कृत भाषा का कोई विकल्प नहीं है. अंग्रेजी में A QUICK BROWN FOX JUMPS OVER THE LAZY DOG एक प्रसिद्ध वाक्य है. अंग्रेजी वर्णमाला के सभी अक्षर उसमें समाहित हैं. किन्तु कुछ कमियाँ भी हैं या यों कहिए कि कुछ कलाकारियाँ किसी अंग्रेजी वाक्य से हो नहीं सकतीं. 1) अंग्रेजी में 26 अक्षर हैं और यहां जबरन 33 का उपयोग करना पड़ा है. चार O हैं और A,E,U,R दो-दो हैं. 2) अक्षरों का ABCD.. यह स्थापित क्रम नहीं दिख रहा है. सब अस्तव्यस्त है. अब संस्कृत में चमत्कार देखिये! क:खगीघाङ्चिच्छौजाझाञ्ज्ञोटौठीडढण:। तथोदधीन पफर्बाभीर्मयोSरिल्वाशिषां सह।। अर्थात्- पक्षियों का प्रेम, शुद्ध बुद्धि का, दूसरे का बल अपहरण करने में पारंगत, शत्रु-संहारकों में अग्रणी, मन से निश्चल तथा निडर और महासागर का सर्जन करनार कौन? राजा मय जिसे शत्रुओं के भी आशीर्वाद मिले हैं. आप देख सकते हैं कि संस्कृत वर्णमाला के सभी 33 व्यंजन इस पद्य में आ जाते हैं. इतना ही नहीं, उनका क्रम भी यथायोग्य है. एक ही अक्षर का अद्भुत अर्थ विस्तार. माघ कवि ने शिशुपालवधम् महाकाव्य में केवल "भ" और "र", दो ही अक्षरों से एक श्लोक बनाया है- ...

श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ के रुद्राभिषेक से होते हैं आश्चर्यजनक लाभ

श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ के रुद्राभिषेक से होते हैं आश्चर्यजनक लाभ - हमारे धर्मग्रंथों के अनुसार हमारे द्वारा किए गए पाप ही हमारे दु:खों के कारण हैं। रुद्रार्चन और रुद्राभिषेक से हमारी कुंडली से पातक कर्म एवं महापातक भी जलकर भस्म हो जाते हैं और साधक में शिवत्व का उदय होता है तथा भगवान शिव का शुभाशीर्वाद भक्त को प्राप्त होता है और उनके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। ऐसा कहा जाता है कि एकमात्र सदाशिव रुद्र के पूजन से सभी देवताओं की पूजा स्वत: हो जाती है। रुद्रहृदयोपनिषद में शिव के बारे में कहा गया है कि सर्वदेवात्मको रुद्र: सर्वे देवा: शिवात्मका अर्थात सभी देवताओं की आत्मा में रुद्र उपस्थित हैं और सभी देवता रुद्र की आत्मा हैं। हमारे शास्त्रों में विविध कामनाओं की पूर्ति के लिए रुद्राभिषेक के पूजन के निमित्त अनेक द्रव्यों तथा पूजन सामग्री को बताया गया है। साधक रुद्राभिषेक पूजन विभिन्न विधि से तथा विविध मनोरथ को लेकर करते हैं। किसी खास मनोरथ की पूर्ति के लिए तदनुसार पूजन सामग्री तथा विधि से रुद्राभिषेक किया जाता है। रुद्राभिषेक के 18 आश्चर्यजनक लाभ    रुद्राभिषेक से हमारी कुंडली के...

शिव महिमा

*☆☆☆ *शिव गाथा* ☆☆☆* *शिव रूद्र है, भीम है, उग्र है।* *शिव चराचर में अव्यग्र है।* *शिव भव है, शर्व है, सर्वज्ञ है।* *शिव मयी यत्र-तत्र-सर्वत्र है।* *शिव कल्याण है, योग है, वैराग है।* *शिव तम में ज्ञान रूपी प्रकाश है।* *शिव अज है, अनादि है, अनन्त है।* *शिव राख लपेटे अघोरी सन्त है।* *शिव अजेय है, शम्भू है, अभय है।* *शिव मृत्युलोक में मृत्युञ्जय है।* *शिव सृजन है, पालक है, तारक है।* *शिव नीलकण्ठ कभी संहारक है।* *शिव माया है, त्रिनेत्र है, त्रिकाल है।* *शिव शीतलता लिए चन्द्रभाल है।* *शिव सत्य है, देवत्व है, शुभत्व है ।* *शिव नश्वर जगत में शिवत्व है।* *शिव जप है, तप है, आदिगुरु है।* *शिव चर-अचर में जगद्गुरु है।* *शिव अव्यक्त है, वृषांक है, हर है।* *शिव प्रजापालक है,गिरीश्वर है।* *शिव भर्ग है, अनघ है, भूतपति है।* *शिव नन्दी पर सवार पशुपति है।* *शिव अजर है, अमर है, अविनाशी है।* *शिव कण कण में रमता कैलाशी है।* *शिव अज है, शाश्वत है, दिगम्बर है।* *शिव त्रिदेवों में पूजनीय महेश्वर है।* *शिव जटाधारी है, शंकर है, अनीश्वर है।* *शिव सकल सृष्टि का पूज्य परमेश्वर है।* *शिव बाघम्बरी है, सोम है, मृगपाणी...

दुनिया का तीसरा बड़ा मंदिर होगा अयोध्या राम मंदिर

दुनिया का तीसरा बड़ा मंदिर होगा अयोध्या राम मंदिर, जानें इससे भी बड़े मंदिर कहां है स्थित 🚩🕉️🍁🚩🕉️🍁🚩🕉️🍁🚩🕉️ अयोध्या में बनने वाले रामंदिर का नक्शा करीब 37 साल पहले बनाया गया था। इस मंदिर को और अधिक भव्य और बड़ा बनाने के लिए इसमें थोड़ा बदलाव किया जा रहा है। पर आपको जानकर आश्चर्य होगा कि विश्व का सबसे बड़ा और भव्य मंदिर भारत में नहीं बल्कि विदेश में है। यह कंबोडिया में स्थापित अंकोरवाट मंदिर है। करीब 67 एकड़ में प्रस्तावित अयोध्या के राममंदिर का दायरा भी अब 100 से 120 एकड़ तक हो सकता है। ऐसे में यह बड़े मंदिरों की श्रेणी में तीसरे स्थान पर आएगा। आइए एक नजर डालते हैं विश्व के सबसे बड़े मंदिरों पर। अंकोरवाट मंदिर अंकोरवाट मंदिर के शिखर की ऊंचाई 213 फीट है। अंकोरवाट दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक है, जो करीब 162.6 हेक्टेयर यानी 401 एकड़ में फैला है। इसे मूल रूप से खमेर साम्राज्य में भगवान विष्णु का मंदिर के रूप में बनाया गया था। मीकांग नदी के किनारे सिमरिप शहर में बना यह मंदिर आज भी संसार का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है। श्रीरंगनाथ मंदिर तमिलनाडु स्थित त्रिची में बना श्रीरंग...

What is the correct word "Sanskrit or Samskrit

What is the correct word *"Sanskrit or Samskrit"* The University Grants Commission has kicked off a controversy by using the word “Samskrit” for our most ancient language instead of “Sanskrit.” Everyone initially thought a typo, spelling mistake in a circular by UGC chairman Ved Prakash on January 21, asking the vice-chancellors and heads of 126 higher education institutions to send details of faculty engaged in teaching “Samskrit.” “The UGC is in the process of devising a scheme for further development and promotion of Samskrit teaching in the country. As part of this endeavour, the UGC, in order to coordinate the work of universities, proposes a database of teachers engaged in teaching and learning in Samskrit,” the circular said. The UGC officials, however, said it was not a typo but deliberate “to correct a historical wrong” because of a wrong spelling picked up by the Britishers two centuries ago and nobody objecting. The UGC took the decision to use the 13th letter of t...